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प्रश्न. 7. गर्मियों की उमस भरी शाम को भी बालगोबिन भगत किस प्रकार शीतल और मनमोहक बना देते थे ?

Answer: बालगोबिन भगत शाम के समय अपने आंगन में अपने कुछ गाँव के प्रेमियों के साथ जिनके हाथों में खँजड़ियों और करतालों रहते बैठ जाते थे बालगोबिन भगत कुछ पद कहते और उनकी प्रेमी मंडली उन्हें दोहराती थी धीरे धीरे वह लोग इतने मग्न हो जाते और उनकी ताल व आवाज एक निश्चित गति से तीव्र होने लगती और बाल गोविंद भगत खँजड़ी लेकर नाचने लगते पूरा वातावरण शीतल और मनमोहक बना देते यही थी उनकी रोज की दिनचर्या और इसी दिनचर्या से गर्मियों की उमस भरी शाम को भी बालगोबिन भगत शीतल और मनमोहक बना देते थे|



बुक कि पंक्तियाँ जिन से उत्तर मिलना है
गर्मियों में उनकी ‘संझा’ कितनी उमसभरी शाम को न शीतल करती! अपने घर के आँगन में आसन जमा बैठते। गाँव के उनके कुछ प्रेमी भी जुट जाते। खँजड़ियों और करतालों की भरमार हो जाती। एक पद बालगोबिन भगत कह जाते, उनकी प्रेमी-मंडली उसे दुहराती, तिहराती। धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होने लगता-एक निश्चित ताल, एक निश्चित गति से। उस ताल-स्वर के चढ़ाव के साथ श्रोताओं के मन भी ऊपर उठने लगते। धीरे-धीरे मन तन पर हावी हो जाता। होते-होते, एक क्षण ऐसा आता कि बीच में खँजड़ी लिए बालगोबिन भगत नाच रहे हैं और उनके साथ ही सबके तन और मन नृत्यशील हो उठे हैं। सारा आँगन नृत्य और संगीत से ओतप्रोत है।


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