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प्रश्न. 5. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर लिखिए : 1×4 = 4

(क) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में रस पहचानकर लिखिए :

हाथ में घाव थे चार

थी उनमें मवाद भरमार

मक्खी उन पर भिनक रही थी

कुछ पाने को टूट पड़ी थी।

उसी हाथ से कौर उठाता

घृणा से मेरा मन भर जाता।

(ख) 'वीर रस' का एक उदाहरण लिखिए ।

(ग) "क्रोध" किस रस का स्थायी भाव है ?

(घ) विभाव किसे कहते हैं ?

(ङ) हास्य रस का स्थायी भाव क्या है ?

Answer:
(क) वीभत्स रस – वीभत्स का स्थायी भाव जुगुप्सा है। अत्यंत गंदे और घृणित दृश्य वीभत्स रस की उत्पत्ति करते हैं। गंदी और घृणित वस्तुओं के वर्णन से जब घृणा भाव पुष्ट होता है तब यह रस उत्पन्न होता है।

(ख) 'वीर रस' का उदाहरण "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।"

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

(ग) रौद्र रस का स्थायीभाव 'क्रोध' है। विरोधी पक्ष द्वारा किसी मनुष्य, देश, समाज और धर्म का अपकार अथवा अपमान करने के उसके प्रतिशोध में जो क्रोध का भाव पैदा होता है वही रौद्र रस के रूप में अभिव्यक्त होता है।

(घ) विभाव का अर्थ है "कारण"। जिन कारणों से सहृदय सामाजिक के हृदय में स्थित स्थायी भाव उदबुद्ध होता है उन्हें विभाव कहते है। यह दो प्रकार के होते है-
1.आलंबन विभाव
2.उद्दीपन विभाव

(ङ) हास्य रस का स्थायी भाव "ह्मस" / हास / होस है |


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